Thursday, June 18, 2009

बुलंदियां

कुछ कर गुज़र इस कदर,
कि शोहरत भी तेरा नाम पूछे |

परवाज़ कर उन बुलंदियों पर,
कि फ़राज़ भी तेरा नाम पूछे |

लोग राह तय कर,
मंजिलों पर कयाम करते हैं|

तू कुछ इस कदर कर,
कि मंजिल तेरा कयाम पूछे|

तू बन वो मुक़द्दर का सिकंदर,
कि मुक़द्दर तेरा घर पूछे|

तोड़ दे सारी किस्मत-ओ-करम कि बंदिशे,
जब पूछे हक-ओ -इन्साफ तो तेरा दर पूछे||

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